वेदा वाले ऋषिया तेरी कोई नहीं मिसाल ।
तर्ज: चाँदी जैसा रंग है तेरा
वेदा वाले ऋषिया तेरी कोई नहीं मिसाल ।
एक तू है बेमिसाल दयानन्द,
तू ने किया है कमाल।।
इस दुनिया ने ज़हर के प्याले,
कितनी बार पिलाए ।
तू ने काँटे चुनकर सब
राहों पे फूल खिलाए।।
तेरे सत्यार्थ प्रकाश ने
सारे मन के भेद मिटाए ।
वेद मार्ग तू ने दिखलाया
सबको किया निहाल।।
बिगुल क्रान्ति का सबसे पहले
तू ने यहाँ बजाया ।
और स्वराज का सबसे पहले
तुमने अर्थ बताया ।।
तुमने ऋषियों की वाणी का
अमृत हमें पिलाया ।
देकर ज्ञान की ज्योति सबको,
तुमने किया खुशहाल।।
तेरे पग छूते ही धंरा की
माटी हो गई ’कंचन’ ।
तुमको सौ-सौ नमस्कार
तुमको शत-शत है वन्दन।।
हम सब मिलकर आर्यजन
करते तेरा अभिनन्दन ।
गाते है यश दसों दिशाएं
धरती गगन विशाल ।।
रचना:- कंचन कुमार










