वेद पढ़ा जाए और हवन किया जाए

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वेद पढ़ा जाए और हवन किया जाए

वेद पढ़ा जाए और
हवन किया जाए,
ऐसे परिवार को ही
स्वर्ग कहा जाए ॥

सत्य रंग-२ में जिनके रमा हो
खुश रहता है उनको संविधाता,
प्रेम हृदय में जिनके नहीं है
उनको ईश्वर नजर दूर आता।
कुछ सुहाता नहीं,
सत्संग भाता नहीं,
जीवन पशुओं से बदतर बिताए ॥
वेद पढ़ा जाए और हवन…….

कर्म नेकी के जो कर गए हैं,
विश्व में नाम उनका अमर है,
उनके जीवन की ज्योति से
अनगिन भूले पथिकों ने पाई डगर है।

धर्म छोड़ा नहीं, नियम तोड़ा नहीं जीते
उनके सदा गीत गाए॥
वेद पढ़ा जाए ओर हवन…….

सबके घट घट रमा प्राण प्यारा,
सारा संसार है यह उसी का,
स्वयं स्वारथ में फस के जो बंदा
दिल दुःखाए नहीं जो किसी का।
स्वप्न में भी कभी दोष आते नहीं.
‘राघव’ मानव वही कहलाए ॥
वेद पढ़ा जाए और हवन किया जाए……