उठो ऐ आर्य वीरी जला दो

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उठो ऐ आर्य वीरी जला दो

उठो ऐ आर्य वीरी जला दो
पाप की होली-2

बन्दूकें लातियाँ लेकर,
निकल जाओ जो तुम घर से।
हुंकारें शेरों की सुनकर,
भगेंगे गीदड़ फिर डर से।
नपुंसक क्यों चनी बैठी
उधमसिंह वीर की टोली उठो ऐ….।

कृष्ण के देश में वीरो,
गऊ की हत्या होती है।
राम के बेटे सोते हैं,
कृष्ण के वंशज सोते हैं।
काटलो गर्दनें उनकी काटते
गऊएं जो भोली उठो ऐ….।

दहेज के पाँव यहाँ फैले,
अनेकों बहनें रोती हैं।
कोई तो खुदकशी करती,
किसी की हत्या होती है।
काटलो गर्दनें उनकी बचालो
बहनों की डोली उठो ऐ….।

बाड़ ने खेत को खाया,
चमन को लूटते माली।
बने हैं रक्षक यहाँ भक्षक
कर रहे देश को खाली।
बचालो देश को वीरो चलाकर
उन पर तुम गोली उठो ऐ….।