उसी प्रभु ने उसी प्रभु ने

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उसी प्रभु ने उसी प्रभु ने

उसी प्रभु ने उसी प्रभु ने
उसी
प्रभु ने दे दीना यह मानव चोला ।।


हवन व सन्ध्या तूने कुछ भी न कीना
विषयों में यूं ही खो दीना-ये मानव ।।


नर तन का चोला कैसा सुन्दर बनाया
तूने ना उसका ध्यान कीना-ये मानव ।।


आठ चक्र नौ द्वारों की नगरी जीवन
है ये अनमोला-ये मानव ।।


भूषण प्रभु ही नैया पार लगाये
नाम जो तूने उसका लीना-ये मानव ।।