तुम्हारे बताए ही कर्म करें हम

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तुम्हारे बताए ही कर्म करें हम

तुम्हारे बताए ही
कर्म करें हम
जिएँ तो जिएँ प्रभु
तेरे अनुयायी बन
तुम्हारे बताए ही

बड़े छोटे कर्म हों
तुझमें समर्पित
पतित कर्म जीवन के
सारे हैं अनुचित
जिएँ हम तेरी ही
दीप-ज्योतियाँ बन
सुकर्मों से बन जाए
अनमोल जीवन
तुम्हारे बताए ही
कर्म करें हम

आठों प्रहर हो
तेरा ही पूजन ‌
बने शान्त सात्विक
सुखमय जीवन
तुम्हारे पवित्र भाव से
चले साँस-धड़कन
सुकर्मों से बन जाए
अनमोल जीवन
तुम्हारे बताए ही
कर्म करें हम

हर वस्तु का देखें
निर्लेप शुद्ध स्वरूप
तभी तो पहचान होगी
मनुष्यों की अनूप
होगी विशुद्ध दृष्टि
कृति होगी उत्तम
सुकर्मों से बन जाए
अनमोल जीवन
तुम्हारे बताए ही
कर्म करें हम
जिएँ तो जिएँ प्रभु
तेरे अनुयायी बन
तुम्हारे बताए ही

बने जो ‘नृचक्षस्’
उसे भय ना खाए
कठिन से कठिन प्रसङ्ग
सुतर होता जाए
बाधा रहित तरणी से
करो प्रभु तारण
सुकर्मों से बन जाए
अनमोल जीवन
तुम्हारे बताए ही
कर्म करें हम
जिएँ तो जिएँ प्रभु
तेरे अनुयायी बन
तुम्हारे बताए ही