तुम तो बसे प्रभु कण-कण में

0
91

तुम तो बसे प्रभु कण-कण में (तर्ज-घर आया मेरा परदेसी)

तुम तो बसे प्रभु कण-कण में।
प्रीत लगी तेरे सिमरन में।

१. राह तुम्हारी भूल गये।
जग झूले पर झूल गये।
उलझ गये इस उलझन में।
प्रीत लगी तेरे…….

२. तुम नज़रों में नज़ारों में।
गुलशन और बहारों में।
फूल खिले मन उपवन में।
प्रीत लगी तेरे…….

३. तुम जैसा कोई और नहीं।
तेरे बिना कोई ठौर नहीं।
देख चुके हम जीवन में।
प्रीत लगी तेरे……..

४. हर दम तुझको ध्याते रहें।
गीत प्रभु तेरे गाते रहें।
चाह यही अब धड़कन में।
प्रीत लगी तेरे……..

५. भगवन् तेरा प्यार मिले।
जीवन को आधार मिले।
बात बने इस नर तन में।
प्रीत लगी तेरे………

६. द्वार तुम्हारे आये हैं।
दिल में तमन्ना लाये हैं।
पथिक पड़े तेरे चरणन मे।
प्रीत लगी तेरे………..