तू ही इष्ट मेरा
तू ही इष्ट मेरा, तू ही देवता है।
तू ही बन्धु मेरा, तू माता-पिता है।
नहीं चाहना है कोई और दिल से।
तुझे चाहता हूँ, यही चाहना है।।
रहा ढूंढ है तुझ को, कब से जमाना।
तू दिल में है, और दर्दे दिल की दवा है।।
खतावार है दरअसल अहले दुनियां।
फकत इक तू ही विश्व में बेखता है।।
जहालत से हम तुझ को, देखें न देखें।
मगर तू हमें, हर घड़ी देखता है।।
बहुत कोशिशें की, बहुत सिर खपाया।
समझ में न आया कि संसार क्या है।
अगर दर्दे दिल है तो दिल को टटोलो।
इस दिल में ही दर्दे दिल की दवा है।।
जवानों जवानी में कुछ काम कर लो।
समझते हो जिसको जवानी, हवा है।।
पता, पत्ता-पत्ता तेरा दे रहा है।
सरासर गलत है कि तू लापता है।।
मुसाफिर जरा इस मुसाफिर से पूछो।
कहां से चला है? कहां जा रहा है।।
प्रभु से प्रार्थना, हृदय से की,
स्वीकार होती है।
मुश्किल यह है कि यह,
बड़ी मुश्किल से होती है।।










