तेरे मन के कुविचार,करे छुप छुप
स्वर :- तेरे प्यार में दिलदार
तेरे मन के कुविचार,
करे छुप छुप
पापा चार कोई देखे या ना देखे
प्रभु देख रहा है।।
वाणी से माला जपता
सदा राम नाम की बगुले
की भांति कहो भक्ति किस
काम की भक्ति किस काम की,
तेरी सुबह शाम की
भोली मछली पछतायेगी,
कर तेरा सत्कार।।१।।
तेरे कर्म देख रहा प्रभू तेरे पास में
तुझ से ना दूर है वो तेरी श्वास
श्वास में तेरी श्वास श्वास में,
यही आस पास में सदा देखता
रहता तेरे अन्दर का संसार।। २।।
पापों से बचना है तो एक
बात मान ले अपने जैसी
आत्मा सबकी ही जान ले
स्वयं को सवार ले सुरेन्द्र
विचार ले सुख पायेगा नित
ही प्यारे पाकर शुभ संस्कार।। ३।।










