तेरा ओम नाम रम जावे

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तेरा ओम नाम रम जावे

तेरा ओम नाम रम जावे,
प्रभु जी मेरी नस-नस में।
तेरी भक्ति का रस भर जावे,
प्रभु जी मेरी नस-नस में।।

तू दाता मैं दीन भिखारी,
तू स्वामी मैं भक्त पुजारी।
तेरी गूंज मेरे मन भावे,
प्रभुजी मेरी नस-नस में।।

पाप मिटा मन निर्मल कीता,
ओ३म् नाम दा अमृत पीता।
अज प्रेम छलकदा आवे,
प्रभु जी मेरी नस-नस में।।

अज मिठ्या मन दा अंधेरा,
मैंनू मिलया प्रीतम मेरा।
अज प्रेम दी ज्योति जग जावे,
प्रभुजी मेरी नस-नस में।।

मेरा प्रीतम घट-घट वासी,
है वो अजर-अमर अविनाशी।
गुण गावां ते मुख भर जावे,
प्रभु जी मेरी नस-नस में।।