तन से तन मिले हैं।
तन से तन मिले हैं।
मगर कभी न दिल मिले।
मन में द्वेष छल कपट
चेहरों से खिल मिले। टेक।
हम जब आये पास में
वह दूर हो गये।
रिश्ते सारे प्यार के
काफूर हो गये।।
सीने सीने से फटे सीने
न सिले मिले । । 1 ।।
अस्मत व जानों माल
सब कदमों पै घर दिये ।।
हमने अपने देश के
टुकड़े भी कर दिये।
इतने पर भी वह हमें
बनकर कातिल मिले।।2।।
चोटों पै चोट खाके
सदा हंसते ही रहे।
अपनेपन के जाल मे
हम फंसते ही रहे।।
ले के उम्मीदे वफा कभी
तो मंजिल मिले ।।3।।
पत्थर दिलों से आस
अब मिलने की छोड़ दी।
मजबूर हो उम्मीद की
कलियाँ मरोड़ दी।।
प्रेमी अब उनसे मिलन
शायद मुश्लिक मिले ।।4।।










