आर्य समाज भजन
मन का दीपक बार रे मनवा !
मन का दीपक बाररे मनवा !मन का दीपक बार
ज्योति अन्तर मन की जागेमिटे जगत्...
अतीत से नव-स्फूर्ति लेकर
अतीत से नव-स्फूर्ति लेकरवर्तमान में दृढ़ उद्यम करभविष्य में दृढ़ निष्ठा रखकर कर्मशीलहम रहे निरन्तर ॥१॥
बलिदानों की...
इससे अच्छा और जहां कहां खोजने जाऊं मैं।
इससे अच्छा और जहांकहां खोजने जाऊं मैं।गली-गली डगर डगरपर साथ तेरा पाऊं मैं।अंसुवन...
सुध बिसर गई आज,तेरे मिलन की
ओ३म् मा नो॑ अग्ने स॒ख्या पित्र्या॑णि॒ प्र म॑र्षिष्ठा अ॒भि वि॒दुष्क॒विः सन् ।नभो॒ न रू॒पं ज॑रि॒मा...
जन्म दिया और काया बदली
जन्म दिया और काया बदलीसुख की प्रभु ने छाया कर दी …
जिसे बनाया सुख का साथीदुःख...
बोल वाणी मधुमती
या ते॑ जि॒ह्वा मधु॑मती सुमे॒धाअग्ने॑ दे॒वेषू॒च्यत॑ उरू॒ची ।तये॒ह विश्वाँ॒ अव॑से॒ यज॑त्रा॒ना सा॑दयपा॒यया॑ चा॒ मधू॑नि ॥
ऋग्वेद 3/57/5
बोल वाणी मधुमती,सत्यरूप...
ओ३म् ब्रह्मानन्द प्यारा, ओ३म् प्यारा रे
ओ३म् किम॒ङ्ग त्वा॒ ब्रह्म॑णः सोमगो॒पां किम॒ङ्ग त्वा॑हुरभिशस्ति॒पां न॑: ।किम॒ङ्ग न॑: पश्यसि नि॒द्यमा॑नान्ब्रह्म॒द्विषे॒तपु॑षिं हे॒तिम॑स्य ॥
ऋग्वेद 6/52/3
ओ३म्...
हे सोम प्रभु ! किसलिए तुम्हें ब्रह्मत्व का रक्षक कहते हैं ?
हे सोम प्रभु ! किसलिए तुम्हेंब्रह्मत्व का रक्षक कहते...
दिव्य अंकुरों में ईश्वर तेरा ही वास
दिव्य अंकुरों में ईश्वरतेरा ही वासफूलों में सुगन्ध लताओं मेंतेरा उल्लाससकल धरा पर सुख...
मोहे अन्तर वो स्वर भर दे
ओ३म् परि॑ प्रि॒या दि॒वः क॒विर्वयां॑सि न॒प्त्यो॑र्हि॒तः ।सु॒वा॒नो या॑ति क॒विक्र॑तुः ॥
ऋग्वेद 9/9/1
मोहे अन्तर वो स्वर भर...
तेरी लीला उत्तम न्यारी
ओ३म् कस्य॑ नू॒नं क॑त॒मस्या॒मृता॑नां॒मना॑महे॒ चारु॑ दे॒वस्य॒ नाम॑ ।को नो॑ म॒ह्या अदि॑तये॒ पुन॑र्दात्पि॒तरं॑ चदृ॒शेयं॑ मा॒तरं॑ च ॥
ऋग्वेद 1/24/1
तेरी...
अ॒स्य श्रवो॑ न॒द्य॑: स॒प्त बि॑भ्रति॒द्यावा॒क्षामा॑ पृथि॒वी द॑र्श॒तं वपु॑: ।अ॒स्मे सू॑र्याचन्द्र॒मसा॑भि॒चक्षे॑ श्र॒द्धेकमि॑न्द्र चरतो वितर्तु॒रम् ॥
ऋग्वेद 1/102/2
जहाँ भी देखो वहीं है ईश्वर,यशोगान...











