स्त्री पुरूष का स्वाभाविक व्यवहार

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स्त्री पुरूष का स्वाभाविक व्यवहार

स्त्री पुरूष का स्वाभाविक व्यवहार,
साधन के बिन रूकना है दुश्वार।

पूर्ण वैराग्यवान हो,
योगी विद्वान महान हो,
विषय वासनाओं का पहाड़,
राई के समान हो। इसके सिवाय,
सारे उपाय, हैं आंशिक उपचार ।।
साधन के बिन………

यह है ऋषियों का कहना,
सदा ही सावधान रहना,
हाव भाव बरताव से,
वासनाओं में मत बहना,
जरा सी भूल,
चटा दे धूल धिक्कारे संसार ।।
साधन के बिन……..

खान पान शुद्ध सहन,
वेदों का अध्ययन गहन,
पिता और पुत्री माँ और बेटा
पृथक शयन करें भाई बहन,
इतना बचाव भंवर से नाब
जीवन की हो पार।।
साधन के बिन………

कहे ब्रह्मचारी, है कामी
धरती ऊपर बदनामी,
“प्रेमी” गृहस्थ ब्रह्मचारी
जो है विधिवत ऋतुगागी,
दाढ़ी व केश भाषा व
भेष नहीं योग्यता का आधार ।।
साधन के बिन……….।।4।।