सृष्टि रचाने वाले, कितना महान् है तू।

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सृष्टि रचाने वाले, कितना महान् है तू।

सृष्टि रचाने वाले,
कितना महान् है तू।
दाता दया के सागर,
प्राणों का प्राण है तू।

‘बेमोल’ बैठ पंछी
तुझको ही भज रहे हैं।
ऊंचे पहाड़ टीले
दुल्हन से सज रहे हैं।
नगमे से बज रहे हैं
मीठी-सी तान है तू…..

सूरज बनाया तूने,
चन्दा रचाया तूने।
तारों को रोशनी दी,
नभ में सजाया तूने।
सब कुछ बनाया तूने,
पर लामकां है तू….ا

सारे जहाँ के वाली,
ए गुलशनों के माली।
हर चीज से है जाहिर,
हिकमत तेरी निराली।
फूलों में तेरी लाली,
पर बेनिशान है तू….।

पापी जो पाप करते,
नहीं तेरा जाप करते।
अपने किये कर्म पर,
ना पश्चात्ताप करते।
उन पर भी मेहर तेरी,
कैसा मेहरबान है तू….।