सोते वतन को जगाना होगा

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सोते वतन को जगाना होगा

सोते वतन को जगाना होगा,
सीता सी खुद को बनाना होगा

पाप व पाखण्ड को मिटाना होगा।।
सोते वतन को…..

द्रौपदी बेचारी आज,
जर-जर रोती है,
सीता की लाज चौराहे
पे नीलाम होती है।
पापों का गढ़ फिर ढाना होगा ।।
सीता सी …

नंगी तस्वीरें छपतीं,
रोजाना अखबारों में,
नारी का शरीर विकता,
फोटो-इश्तिहारों में।
गौरव को अपने बचाना होगा ।।
सीता सी…

लज्जा नारी का भूषण
है शास्त्र यह बताते हैं,
इनकी वीरता की भी,
मिसाल नहीं पाते हैं ।
लाना वो पिछला जमाना होगा।।
सीता सी…

कहां तक सुनायें हम,
अपनी कहानी को,
भूलेगा अंग्रेज कैसे झांसी
वाली रानी को जौहर वही
फिर दिखाना होगा ।।
सीता सी …

गार्गी मन्दालसा सी,
स्वयं को बनायेंगी,
देश से अविद्या अंधकार को मिटायेंगी।
“महेन्द्र” सफल तब ये गाना होगा।।
सीता सी..