शत्-शत् है नमन,तुझे धन-धन-धन
तर्ज – कोई शहरी बाबू
शत्-शत् है नमन,
तुझे धन-धन-धन,
ओ माँ तेरे रूप अनेकों हैं,
ये अब मैं जान गया
मेरी माता शेरोंवाली,
तेरी महिमा निराली
ये बात भी मान गया,
ये अब मैं जान गया ये अब……..
शब्दों के हैं ये मोती,
जिनसे मैं तेरा मान करूँ
वसुन्धरा तू माँ है मेरी,
माँ तेरा क्या बखान करूँ
लाल तेरा है ‘सचिन’,
ना वो रहे तेरे बिन तेरे
चरणों में ध्यान गया,
ये अब मैं जान गया ये अब………
भोजन देती भूखों को,
अन्न धन का भण्डारा है
दाता है तू माँ सबकी,
प्यार भी तेरा न्यारा है
मेरी आन बान शान,
तेरी महिमा महान अब
मैं पहचान गया,
ये अब मैं जान गया ये अब……..
पैदा करके वीरों को,
शान बढ़ा दी भारत की डटे रहे थे
रण में वो, ना थी चाहत
स्वारथ की हो गया अमर,
कारगिल में भंवर दे
प्राण का दान गया,
ये अब मैं जान गया ये अब……..
महन्त यति और योगी भी,
तुझको माता बोलते हैं
आंचल में तेरे रहकर,
संग-संग तेरे डोलते हैं योगीराज घनश्याम,
तेरा लाल हुआ राम
ये मान जहान गया,
ये अब मैं जान गया ये अब………










