सौ बार जन्म लेंगे, सौ बार फना होंगे

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सौ बार जन्म लेंगे, सौ बार फना होंगे

सौ बार जन्म लेंगे,
सौ बार फना होंगे,
अहसान दयानन्द के,
फिर भी न अदा होंगे।।1।।

गुजराज की धरती पर,
सूरज की किरण फूटी।
अज्ञान-अविद्या के
दानव की कमर टूटी-
पुरनूर हुआ भारत,
गुण कैसे बयाँ होंगे।।2।।
सौ बार जन्म लेंगे, सौ बार……

निराकार की पूजा को,
जीवन में उतारा था,
पाषाण का अभिनन्दन,
कब उसको गंवारा था,
मुँह मोड़ लिया क्योंकर,
पत्थर के खुदा होंगे।।3।।
सौ बार जन्म लेंगे, सौ बार…….

आकाश में रोशन है,
ये शम्शो कमर जब तक,
दिन-रात हैं ये जब तक,
ये शाम-सुबह जब तक,
अफसाने दयानन्द के,
दिल से न जुदा होंगे।।4।।
सौ बार जन्म लेंगे, सौ बार……

वीर ‘आर्य मुसाफिर’ से,
सेनानी दिये हमको,
और स्वामी श्रद्धानन्द से,
बलिदानी दिये हमको,
खूँ जिनकी शहादत के,
हर गम की दवा होंगे।।5।।
सौ बार जन्म लेंगे, सौ बार ……

स्वागत के लिये जिनके,
पाषाण थे या कंकर,
गम खाके बने हनुमत,
विष पीके बने शंकर,
फूल उनके मुकद्दर में,
होंगे भी तो क्या होंगे।।6।।
सौ बार जन्म लेंगे, सौ बार…….