पटना। वैदिक संस्कृति के संरक्षण, सनातन धर्म के मूल स्वरूप के प्रचार-प्रसार तथा समाज को वेदों की ओर प्रेरित करने के उद्देश्य से आर्य समाज के आर्योपदेशक आचार्य संजय सत्यार्थी (पटना) द्वारा एक प्रेरणादायी वैदिक संदेश “सनातन धर्म बचाओ रे” प्रस्तुत किया गया है। इस संदेश के माध्यम से समाज के प्रत्येक व्यक्ति से वेदों का अध्ययन करने, उन्हें जीवन में अपनाने तथा वैदिक मूल्यों के आधार पर राष्ट्र एवं समाज के उत्थान का आह्वान किया गया है।
इस प्रेरक संदेश का मूल भाव है कि “घर-घर में वेद, जन-जन में वेद, चलो वेद पढ़ाओ रे। पढ़कर सत्यार्थ, सनातन धर्म बचाओ रे।” यह केवल एक नारा नहीं, बल्कि समाज को वैदिक ज्ञान से जोड़ने का एक सशक्त अभियान है। संदेश में स्पष्ट किया गया है कि वेद मानवता के आदि एवं सार्वभौमिक ज्ञानग्रंथ हैं और प्रत्येक व्यक्ति को उनका अध्ययन करना चाहिए।
पोस्टर में महर्षि दयानन्द सरस्वती के उस अमर संदेश को भी प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया है जिसमें उन्होंने कहा था— “वेदों की ओर लौट चलो, यही सत्य है, यही कल्याण है।” यह संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना महर्षि दयानन्द के समय था। उन्होंने समाज को अंधविश्वास, पाखण्ड और रूढ़ियों से मुक्त कर सत्य, तर्क और वेदों पर आधारित जीवन जीने की प्रेरणा दी थी।
संदेश में यह भी बताया गया है कि वेद ही धर्म का मूल आधार हैं तथा भारतीय दर्शन, उपनिषद, ब्राह्मण ग्रंथ, उपवेद और अन्य ज्ञान परंपराओं का आधार भी वेद ही हैं। वेदों के अध्ययन से मनुष्य सत्य, नैतिकता, कर्तव्य, विज्ञान, अध्यात्म और मानवता का वास्तविक ज्ञान प्राप्त कर सकता है। इसलिए प्रत्येक परिवार तक वेदों का संदेश पहुँचाना समय की आवश्यकता है।

आचार्य संजय सत्यार्थी ने अपने संदेश में समाज से आह्वान किया है कि धर्म की रक्षा, संस्कृति के संरक्षण और श्रेष्ठ जीवन मूल्यों की स्थापना के लिए आर्य समाज के साथ जुड़ें तथा वैदिक विचारधारा को जन-जन तक पहुँचाने में सहयोग करें। उन्होंने संस्कृत, संस्कृति और संस्कारों के संरक्षण को राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य का आधार बताते हुए युवाओं से विशेष रूप से वैदिक साहित्य का अध्ययन करने और समाज सेवा में आगे आने का आग्रह किया है।
उन्होंने यह भी कहा कि महर्षि दयानन्द सरस्वती के आदर्श आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं। वेदों का अध्ययन एवं प्रचार केवल धार्मिक कार्य नहीं, बल्कि मानवता, शिक्षा, नैतिकता और राष्ट्र निर्माण का एक महान अभियान है। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में वैदिक सिद्धांतों को अपनाए, तो एक सशक्त, शिक्षित, संस्कारित और समरस समाज का निर्माण संभव है।
अंत में उन्होंने सभी वैदिक प्रेमियों एवं समाज के जागरूक नागरिकों से आह्वान किया कि वे अपने परिवार, समाज और आने वाली पीढ़ियों को वेदों से जोड़ने का संकल्प लें तथा महर्षि दयानन्द सरस्वती के संदेश “वेदों की ओर लौट चलो” को जन-जन तक पहुँचाने में अपना योगदान दें।
संपर्क सूत्र
आचार्य संजय सत्यार्थी
आर्योपदेशक, पटना
📞 मोबाइल: 7717 76 61 51
संदेश:
“वेदों की जय हो। आर्य समाज की जय हो।
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