सामवेद का गान था
सामवेद का गान था, मीठी वैदिक तान था।
कहते लोग महामानव, किस मिट्टी का इन्सान था॥टेक॥
मुंशीराम नाम का खत्री भटक गया था जो पथ में।
सुरा-सुन्दरी आ बैठे जिसके किशोर जीवन रथ में।
गंगा की पवित्र धारा में आया था अवरोध जरा।
डरा मंगलचरण अभी से पूर्णविराम लगा अथ में।
कमल धँसा था पंक में, जैसे लक्ष्मी रंक में।
दयानन्द का वरदहस्त पा बदला पूर्ण विधान था॥१॥
सामवेद का……..
पूर्ण समर्पण किया देव के चरणों में झट राम ने।
कर्मयोग की दीक्षा ले ली हो जैसे विश्राम ने।
कायाकल्प हुआ था अब तो जर्जर मुंशीराम का।
महाकाव्य रचने की ठानी जैसे अर्धविराम ने।
साध्य-साधना मिलन हुआ, भगा दूर वासना धुआं।
रोग-भोग छूटे जीवन में, उठा नया तूफान था॥२॥
सामवेद का…….
गुरुकुल परम्परा की नींव इसी स्वामी ने ही डाली।
जीवन दीप धूप भावों की बनी देह पूजा थाली।
सरस्वती के मन्दिर को हर भाँति संवारा सजा दिया।
चमन फूलता फलता जाता चला गया लेकिन माली।
संस्कृति की वह शान था, भारतीय आख्यान था।
पतझड़ के रोते आंगन में वासन्ती मुस्कान था॥३॥
सामवेद का………
राणा का सा स्वाभिमान औ वीर शिवा की सूझ भरी।
प्राण फूंकने चला अभय हो राष्ट्र-देह थी पड़ी मरी।
गांधी जी ने भी श्रद्धा से जिनको गुरुवत नमन किया।
निश्छल निर्भय सारी बातें कह देता था खरी-खरी।
संकट में मुस्काता था, गीत ओज के गाता था।
अभिशापों के बीच खड़ा सबसे ऊँचा वरदान था॥४॥
सामवेद का……….
बीच चांदनी चौक गोरखों को केहरि ने ललकारा।
गैरिक वस्त्रों में मुस्काता रक्त कमल पर ज्यों पारा।
सूरज की गर्जना सुनी अगणित तारे भयभीत हुए।
संगीनें झुक गईं कारवां बढ़ा तोड़ निर्मम कारा।
देह धार वीरता चली, दृश्यमान धीरता चली।
स्वामी श्रद्धानन्द असल में देश धर्म का प्राण था॥५॥
सामवेद का……….
शुद्धि चक्र का बना सारथी सत् स्वरूप दर्शाने को।
भटक गए थे जो राही उनको सत्पथ दिखलाने को।
सीने में गोली खाई पर पीछे हटा न घबराया।
माँ के जाये बिछुड़े भाई पुनः गले लिपटाने को।
अब्दुल रशीद हत्यारा, जीवन दीप बुझा डारा।
राष्ट्र-यज्ञ में सब कुछ बांटा दानी बन गया दान था॥६॥
सामवेद का……….
जामा मस्जिद के मिम्बर से वेदमन्त्र का पाठ किया।
दिल्ली का बेताज बादशहा दिल में बसकर ठाठ किया।
अन्तिम यात्रा ऐसी निकली सारे कीर्तिमान टूटे।
श्रद्धानन्द सुगन्धित सोना हर पत्थर को काठ किया।
तन-मन-धन सब होम दिया, ओम् सोम भर व्योम दिया।
दयानन्द के लिए मनीषी वह अद्भुत हनुमान था॥७॥
सामवेद का………..










