सबसे प्यारी हिन्दी है

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सबसे प्यारी हिन्दी है

सबसे प्यारी हिन्दी है

हिन्दी अपने भारत माँ की, आन-बान और शान है।
हिन्दी से ही अंतर्मन में, जागता स्वाभिमान है।
चाहे भाषाएँ हों अनेकों, सबसे प्यारी हिन्दी है।
सर्वोत्तम श्रृंगार देश का, यह माथे की बिंदी है।
इसी मातृभाषा की रक्षा में, सबका मान-सम्मान है॥१॥

इंग्लिश, अरबी, फारसी, लैटिन—ये सबकी पटरानी हैं।
एक सूत्र में राष्ट्र को बाँधे, इसकी अजब
कहानी है।
संस्कृति का संवाहक, पोषक, इसका अमृत ज्ञान है।

प्रान्तवाद, पृथकतावाद को, दूर भगाने वाली है।
अद्भुत माली राष्ट्रवाद का, बाग सजाने वाली है।
पूरब, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण—इसका ही यशगान है।

भक्ति, वीर और श्रृंगार रसों में, हिन्दी का उत्तम स्थान।
इसे सुरक्षित रखने खातिर, वीरों ने दिए अपने प्राण।
अरिमर्दन का शंख बजा दो, ‘संजय’ का यह आह्वान है॥४॥

हिन्दी, हिन्दी, हिन्दी, हिन्दी—हिन्दी की जयकार करो।
हिन्दी में ही प्राण बसे हैं, हिन्दी का सत्कार करो।
हिन्दी जीवन का दर्शन है, हिन्दी में जनकल्याण है।

हिन्दी मेरा गौरव है

हिन्दी है तो भारत है

— आचार्य संजय सत्यार्थी
आर्योपदेशक, पटना
मो.: 7717766151

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