सबके गुण अपनी हमेशा गलतियाँ देखा करो।

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सबके गुण अपनी हमेशा गलतियाँ देखा करो।

सबके गुण अपनी हमेशा
गलतियाँ देखा करो।
जिन्दगी की हू-ब-हू तुम
झलकियाँ देखा करो।
इच्छाएँ महलों की गर,
तुमको सताएँ आन कर।
कुछ गरीबों की भी जाकर,
बस्तियाँ देखा करो।
सबके गुण अपनी हमेशा गलतियाँ…..

खाने से पहले अगर तुम,
हक पराया सोच लो।
कितने भूखों की हैं इनमें,
रोटियाँ देखा करो।।
सबके गुण अपनी हमेशा गलतियाँ…..

आ दबोचे गर कहीं तुमको,
सिकन्दर सा अभिमान ।
हाथ खाली आते जाते,
अर्थियाँ देखा करो।।
सबके गुण अपनी हमेशा गलतियाँ……

ये जवानी की अकड़ सब,
खाक में मिल जाएगी।
जल चुके जो शव हैं,
उनकी अस्थियाँ देखा करो।।
सबके गुण अपनी हमेशा गलतियाँ…….

विषयों का विष पान कर,
झूठे नशे में चूर हो।
ओ३म् का इक जाम पीकर,
मस्तियाँ देखा करो।।
सबके गुण अपनी हमेशा गलतियाँ…….

जिन्दगी में चाहते हो सुख,
अगर अपने लिये।
दूसरों के गम में,
अपनी सिसकियां देखा करो।
सबके गुण अपनी हमेशा गलतियाँ……