ऋषि तेरा दुनियां में आना भूल जाने के काबिल नहीं है
ऋषि तेरा दुनियां में आना
भूल जाने के काबिल नहीं है
क्यों न सन्देंश तेरा सुनायें,
क्या सुनाने के काबिल नहीं है।
हो रही थी विवाह की तैयारी,
खुशी परिवार में छाई भारी
सुख के साधान को ठोकर थी मारी,
सब मे तेरी तरह दिल नही था।
ऋषि तेरा दुनियां में आना …..
पोल पाखण्ड की तुने खोली,
वेद संवत थी जो बाते बोली,
मर गया दुसरो के लिए तू
क्या सुनाने के काबिल नहीं है।
ऋषि तेरा दुनियां में आना …..
जो जगन्नाथ क्या मन मे आया,
दूध में विष हलाहल पिलाया,
दे गया धन से भर कर के
थैली अब ठहराने के काबिल नहीं है।
ऋषि तेरा दुनियां में आना …..
गायें क्या गाये तेरे तरानें,
तुम ऋषि थे धर्म के दिवाने,
गीत वो जिस में न नाम तेरा,
वह सुनाने के काबिल नहीं है।
ऋषि तेरा दुनियां में आना …..










