ऋषि के गीत गाने की कसम खाई है खाई है।
ऋषि के गीत गाने की
कसम खाई है खाई है।
सच्चाई क्या बताने की
कसम खाई है॥ टेक ॥
जमाना राह को रोके,
और सितम ढाये।
सन्देशा वेद का देंगे,
चाहे सर भी उतर जाये॥
कदम आगे बढ़ाने की
कसम खाई है खाई है॥1॥
कदम सच्चाई के बढ़ते,
रुकते नहीं देखे।
मिले चाहे इन्द्र का पद भी,
झुकते नहीं देखे ॥
ये सर ऊँचा उठाने की
कसम खाई है खाई है॥2॥
दयानन्द के दिवानों को,
चैन कहां पल भर।
बिछे हों राहों में कांटे,
उठा तूफां भी हो सर पर॥
मगर मंजिल पै जाने की
कसम खाई है खाई है॥3॥
हमारे क्यों जुदा हम से,
आज हो बैठे।
हमारी गलतियों से ही,
नाराज हो बैठे ॥
उन रूठों को मनाने की
कसम खाई है खाई है॥4॥
सच्चाई नेकी तो यहां पर,
बिखरी राह में थी।
हमारे बाग की खुश्बू,
सारे जहाँ में थी॥
वही खुश्बू फैलाने की
कसम खाई है खाई है॥5॥
ये माना रोशनी घर में,
दिल में अन्धेरा है।
छिनी मुस्कान कर्मठ क्यों,
उतरा सा चेहरा है॥
आज हंसने हंसाने की
कसम खाई है खाई है॥6॥










