रहें परस्पर प्रेमपूर्वक
रहें परस्पर प्रेमपूर्वक,
हर व्यक्ति परिवार में।
सदा उन्नति की बारिश हो
उत्तम इस व्यापार में ॥
ईश्वर का विश्वास रहे
मन न कभी निराश रहे।
भरा रहे धन कोष द्रव्य से,
छः ऋतु बारह मास रहे।
कभी न कोई आये बाधा,
शुद्ध-पवित्र विचार में।
सदा उन्नति की………
सब इच्छाएँ पूरी हों,
कोई नहीं अधूरी हों।
आलस और अविद्या से,
कई मील की दूरी हों ॥
हीरे, मोती, पन्ना, चमकें,
घर आंगन दीवार में।
सदा उन्नति की……..
धन की वृद्धि भारी हो,
ये आशीष हमारी हो।
उत्तम श्रेष्ठ प्रेरणादायक,
शुभ शिक्षा हितकारी हो।
उमड़-उमड़ आयें ग्राहक,
दौड़ें सभी बाजार में।
सदा उन्नति की………
धन के स्वामी सबको धन दो,
श्रेयमार्ग का दर्शन दो।
सब ऐश्वर्य सुखों के दाता,
दीर्घायु सुख जीवन दो।
रहे स्वरूपानन्द प्रसन्नता
बाल-वृद्ध नर-नार में
सदा उन्नति की……..
घर-घर की शोभा,
घर-घर का गहना।
परिवार में बहता रहे,
स्नेह का झरना ।।










