पृथ्वी माता है मेरी यह मेरी तो नाभि है

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पृथ्वी माता है मेरी यह मेरी तो नाभि है

पृथ्वी माता है मेरी
यह मेरी तो नाभि है
नाभि के समान ही हम
शिशुओं को बाँधती है
वातावरण है अति प्रसन्न
प्रकृति में सादगी है
पृथ्वी माता है मेरी
यह मेरी तो नाभि है

मैं केन्द्र-बिन्दु सर्व हूँ
सर्वशक्ति का भण्डार
सर्वरूप हूँ, सर्वोपरि
सर्वमय हूँ देव उदार
वाणी मेरी अग्निदेव है
मधु मुखवासनी है
पृथ्वी माता है मेरी
यह मेरी तो नाभि है

सूर्यदेव चक्षु बनकर के
प्रविष्ट हैं नेत्रों में
बनकर श्रवण-शक्ति दिशाएँ
प्रविष्ट है कानों में
लोम औषधि-वनस्पतियाँ
त्वचा में आ गई हैं
पृथ्वी माता है मेरी
यह मेरी तो नाभि है

मन चन्द्रमा सा बनकर के
हृदय में हुआ प्रविष्ट
सत्यज्ञानी द्विजगण हैं प्रचारक
शिष्यों में उपविष्ट
कामधेनु है विद्या उनकी
ज्ञान दुग्ध-धारा भी है
पृथ्वी माता है मेरी
यह मेरी तो नाभि है

धरणी के पुत्र बजाओ तुम
कर्तव्य की मधु वेणु
हे धरा मात! विश्वेदेवा!
द्विजगण! हे कामधेनु !
तुम दे दो सदा हमें लाभ भी
हम सब ने माँग की है
पृथ्वी माता है मेरी
यह मेरी तो नाभि है
नाभि के समान ही हम
शिशुओं को बाँधती है
वातावरण है अति प्रसन्न
प्रकृति में सादगी है
पृथ्वी माता है मेरी
यह मेरी तो नाभि है