प्रीत तुमसे लगी दुनिया को प्यार कौन करे !

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प्रीत तुमसे लगी दुनिया को प्यार कौन करे !

प्रीत तुमसे लगी दुनिया
को प्यार कौन करे !
कोई कुछ भी कहे इसका
विचार कौन करे !!
मन है सुन्दर तो रूप
रंग सभी सुन्दर हैं!

व्यर्थ अस्थिर ये बाहरी
श्रृंगार कौन करे !!
छोड़ दी तेरे भरोसे ही
भँवर में नैया ।
मूद माँझी की विनय
बार-बार कौन करे !!

बन गई अनु-मोतियों
की लड़ी देखो तो!
भेंट अब तुमको ये
फूलों के हार कौन करे !!

माँगना है जो वही माँग लेगा
तुमसे ‘प्रकाश’।
बन के भिक्षुक पुकार
द्वार-द्वार कौन करे !!