प्रथम सुमिरूँ उस करतार का जी।
प्रथम सुमिरूँ उस
करतार का जी।
एजी जाने रचि
दियो सब संसार ।।
लीला प्रभु की अपरम्पार है जी ।।
कैसी बनाई अद्भुत सृष्टि है
जो। एजी कोई वही है
सिरजन हार।।नाम तो
पावन प्यारा ओंकार है जी ।।
पृथ्वी चाँद-सूरज रच
दिये जी। एजी कोई जगमग
होइ संसार।। शक्ति का
किनहुँ ना पाया पार है जी।।
छोटे बड़े तारे अनगिनती
चमकाये जी। एजी कोई
फूल रही फुलवारि ।।
मोती तो बिखरे बेशुमार हैं जी।।
सावन महिना रंग सुहावनो जी।
एजी कोई तीजों का त्यौहार ।।
महिला गाय रहीं मेघ मल्हार जी।।
झूला पड़ रहे हरियल बाग में जी।
एजी कोई रेशम डोरी डार ।।
छाई रही अनुपम अजब बहार है जी।।










