प्रार्थना सुनिए श्री भगवान्

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🙏 *ओ३म् त्वामिद्धि त्वा॒यवो॑ऽनु॒नोनु॑वत॒श्चरा॑न् ।**सखा॑य इन्द्र का॒रव॑: ॥*ऋग्वेद 8/92/33

प्रार्थना सुनिए श्री भगवान्

कीजिये जीवन का उत्थान्

हृदय-भक्ति से पारु होकर

करें परिचरण चारु होकर

हृदयी प्रीत झंकार दीजिए

वाणी को देना वरदान

प्रार्थना सुनिए श्री भगवान्

स्तुति गान मस्ती में झूमे

बरसे ज्ञानामृत की बून्दें

स्थान-स्थान तव अलख जगाएँ

लक्ष्य हो कर्मप्रधान

प्रार्थना सुनिए श्री भगवान्

स्तुति रूप में धर्म-कर्म हो

गुणगाथा सङ्ग सत्य-वरण हो

होवे सेवा, अति लयकारी

कर्म, वचन, मन, प्राणप्रार्थना

सुनिए श्री भगवान्

जागे स्वयं तो जग को जगाएँ

व्यापक भजन क्रियामय गायें

तेरी शक्तिमती-भक्ति का

बहे प्रवाह निष्काम

प्रार्थना सुनिए श्री भगवान्

किजिए जीवन का उत्थान्

प्रार्थना सुनिए श्री भगवान्*