प्रभु तेरी माया कहीं धूप कहीं छाया।

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प्रभु तेरी माया कहीं धूप कहीं छाया।

प्रभु तेरी माया कहीं धूप कहीं छाया।
तूने यह विशाल विश्व किस तरह बनाया।
प्रभु तेरी माया कहीं……….

१. जगमगा रहे हैं ये सितारे आसमान के।
सूर्य चन्द्र गीत गा रहे हैं तेरी शान के।
इन सभी को किस प्रकार अधर में टिकाया।
प्रभु तेरी माया कहीं……….

२. दिव्य दृश्य देख देख दृष्टि दंग हो गई।
सोच सोच कर हमारी सोच भंग हो गई।
एक पंखुड़ी का भेद भी न जान पाया।
प्रभु तेरी माया कहीं………..

३. बहुत रंग रूप दिये प्राणियों को आप ने।
कर दिया कमाल जिस्म जीव के मिलाप ने ।
जड़ शरीर को सजीव तूने कर दिखाया।
प्रभु तेरी माया कहीं………..

४. निराकार निर्विकार निर्विकल्प रूप हो।
अमर हो अनादि हो अनन्त हो अनूप हो।
‘पथिक’ तेरी भक्ति में ही शक्ति को लगाया।
प्रभु तेरी माया कहीं……….