प्रभु को भूला रे

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प्रभु को भूला रे (तर्ज – झुमका गिरा रे)

प्रभु को भूला रे।
प्रभु को भूला रे,
फंस माया के जंजाल में।
प्रभु को भूला, प्रभु को भूला,
प्रभु को भूला रे।।

धन यौवन के मद में भूला,
डोला फूला-फूला।
मैं मेरी में उमर बीत गई,
धर्म-कर्म सब भूला।
फिर प्रभु को भूला रे,
फंस फैशन के बाजार में ।।१।।

काम, क्रोध मद लोभ मोह में,
सदा रहा भरमाया।
काम न आया तू दीनों के,
वृथा समय गंवाया।
फिर प्रभु को भूला रे,
फंस मानव पापाचार में ।।२।।

जोड़-जोड़ धन भरी तिजूरी,
करि-करि पाप कमाई।
हाय-हाय में जीवन बीता,
दान करी न पाई।
फिर प्रभु को भूला रे,
फंस दो नम्बर व्यापार में ।।३।।

मात-पिता गुरु को नहीं पूजा,
पत्थर पूजन धाया।
ईश भजन अतिथिन की सेवा में,
नहीं ध्यान लगाया।
फिर प्रभु को भूला रे,
फंस करके अत्याचार में ।।४।।

खुदा देता है जिनको खुशी,
उनको गम भी होते हैं।
जहाँ बजती है शहनाई,
वहाँ मातम भी होते हैं।।