भक्ति
प्रभु की याद में घड़ियाँ, जो जीवन की बितायेगा।
कमाई का यह धन है, सफर में काम आएगा।
बिना इसके किसी धन ने, कभी न साथ जाना है,
सिकन्दर की दशा सबको, सुना कर के चेताना है।
गया जो चेत निश्चय ही, प्रभु को न भुलाएगा।। (1)
प्रभु की याद में घड़ियाँ……….
महाजन बन गये लाखों, प्रभु से नेह लगा करके,
निभाया धर्म याचक का, किसी के काम आ करके।
इसी यश को कमा करके, अमर यश को बनाएगा।। (2)
प्रभु की याद में घड़ियाँ……..
लगा श्वासों की पूँजी को, अमर साथी के चिन्तन में,
अनोखे काम कर डाले, ऋषि सेवा के जीवन में।
पढ़ेगा जो ऋषि-जीवन इसी शिक्षा को पायेगा।। (3)
प्रभु की याद में घड़ियाँ……..
कमाना “देश” इस धन को, कमाया जा सके जितना,
बुराइयों से बचा निज को, बचाया जा सके जितना ।
विदाई के समय तू भी ऋषि सम मुस्कुराएगा। । (4)
प्रभु की याद में घड़ियाँ……










