प्रभु के लाखों उपहार झोली में भरले

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प्रभु के लाखों उपहार झोली में भरले

प्रभु के लाखों उपहार झोली
में भरले काटों में जन्म पाते
फिर भी रहते मुस्काते फूलों की
खुशियाँ हजार झोली में भर ले ॥१॥

प्रातः उषा की लाली लेकर
जीवन खुशहाली आती है नित
ही तेरे द्वार झोली में भरले ।।२।।

वृक्षो की डाली डाली गाती है
कोयल काली रसना में लेके रस
की धार झोली में भरले ।।३।।

नर तन को मधुबन करले इससे
भव सागर तरले अवसर ना
मिलता बारम्बार झोली में भरले ।।४।।

सागर पहाड़ तारे सृष्टि के
ये नज़ारे प्रेरणा करते कर
श्रृंगार झोली में भरले ।।४।।