प्रभु जी तुम चंदन हम पानी।
प्रभु जी तुम चंदन हम पानी।
जाकी अंग अंग बास समानी।
प्रभु जी तुम धन वन हम मोरा।
जैसे चितवत चंद चकोरा।।
प्रभु जी तुम दीपक हम बाती।
जाकि ज्योति जले दिन राती।
प्रभु जी तुम मोती हम धागा।
जैसे सोनहि मिलत सुहागा।
प्रभु जी तुम स्वामी हम दासा।
ऐसी भक्ति करे रैदासा।।










