प्रभु दर्शन पाने आए थे

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प्रभु दर्शन पाने आए थे

प्रभु दर्शन पाने आए थे,
प्रभु दर्शन पाना भूल गए।
जिस पथ पर हमको जाना था,
उस पथ पा जाना भूल गए ॥

मानव जीवन को पाकर भी,
यह उलझन हम से न सुलझी।
उस अन्तर्यामी के अन्दर,
हम ध्यान लगाना भूल गए।

यम नियमों के साधन द्वारा,
अपने को निर्मल कर न सके।
ऋषियों की भाँति ज्योति से,
ज्योति को मिलाना भूल गए ॥

अपनी ही अविद्या के कारण,
भगवान् को समझा दूर सदा।
हम खुलकर खेले पापों से,
शुभ कर्म कमाना भूल गए ॥

धरती के मानव हैं जितने
भाइयों का सबसे नाता है।
हम हिंसावादी बन बैठे,
देवों का ज़माना भूल गए ॥

भूले सुलझाने देश की फ़िर,
प्रभु भक्त दयानन्द जी आए।
ऐसे उपकारी नेता की,
आज्ञा का निभाना भूल गए ॥