प्रभु भक्ति में चूर रहते हैं

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प्रभु भक्ति में चूर रहते हैं

प्रभु भक्ति में चूर रहते हैं,
गम की दुनियां से दूर रहते हैं।

उस गली में गरीब खाना है,
जिस गली में हुजूर रहते हैं।।1।।

मेरे दिल में जो इक अदालत है।
उसमें सब बेकसूर रहते हैं।।2।।

अपनी आदत है सिर्फ चुप रहना,
सुनते सबकी जरूर रहते हैं।। 3।।

उन दिलों से मिलेगा क्या प्रेमी,
जिन दिलों में फितूर रहते हैं। ।4।।