पानी से तन शुद्ध करो, मन शुद्ध करो सच्चाई से।

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शिक्षा

पानी से तन शुद्ध करो,
मन शुद्ध करो सच्चाई से।
विद्या तप से शुद्ध आत्मा,
बुद्धि ज्ञान पढ़ाई से।।

विद्या और तपस्या से,
शुद्ध आत्मा होती है।
वेदज्ञान की पावन धारा,
भीतर के मल धोती है।
अन्दर बाहर की शुद्धि हो,
कर लो कमाई सफाई से।।1।।
पानी से तन शुद्ध करो मन शुद्ध करो…………

बोल चाल में भी शुद्धि हो,
शुद्धि सदा विचारों में।
हो गुण कर्म स्वभाव में शुद्धि,
और सभी संस्कारों में।
जीवन शुद्ध बने मेहनत की,
असली नेक कमाई से। ।2।।
पानी से तन शुद्ध करो मन शुद्ध करो…………

थोड़ी बहुत किसी कारण से,
जहाँ मलिनता आ जाये।
कोशिश करो वहाँ वह ज्यादा,
देर नहीं टिकने पाये।
झाडू मन में रोज लगाया कर,
बचते रहो बुराई से।।3।।
पानी से तन शुद्ध करो मन शुद्ध करो……

कभी किसी का बुरा न चाहो,
तुम जीवन की राहों में।
सदा रहो गंगाजल जैसे,
सबकी खुली निगाहों में।
‘पथिक’ लोक परलोक सुधारो,
जनकल्याण भलाई से।।4।।
पानी से तन शुद्ध करो मन शुद्ध करो….