ओ३म् महिमा
ओ३म् नाम का सुमिरन कर ले, कर दे भव से पार तुझे।
कह लिया कितनी बार तुझे।। कह लिया कितनी बार तुझे।।
जिस नगरी में वास तेरा, ये ठग चोरों की बस्ती है।
लूट जाते हैं बड़े बड़े यहाँ, फिर तेरी क्या हस्ती है।
जिसको अपना समझ रहा ये, धोखा दे संसार तुझे।
कह लिया कितनी बार तुझे। कह लिया कितनी बार तुझे।।
ओ३म् नाम का सुमिरन कर ले, कर दे भव से पार तुझे।
हाथ पकड़ कर गली गली जो, मित्र तुम्हारे डोल रहे।
कोयल जैसी मीठी वाणी, कदम कदम पर बोल रहे।
बनी के साथी बिगड़ी में ना, गले लगाएं यार तुझे ।।
कह लिया कितनी बार तुझे। कह लिया कितनी बार तुझे ।।
ओ३म् नाम का सुमिरन कर ले, कर दे भव से पार तुझे।
धन दौलत का बना दीवाना, धर्म कर्म सब भूल गया।
सन्ध्या हवन और दान दिया ना, नींद नशे में टूल गया।
ईश्वर को भी नहीं मानता, कैसा चढ़ा खुमार तुझे ।।
कह लिया कितनी बार तुझे। कह लिया कितनी बार तुझे ।।
ओ३म् नाम का सुमिरन कर ले, कर दे भव से पार तुझे।
तुझसे पहले गए बहुत से, कितना धन ले साथ गए।
‘लक्ष्मणसिंह बेमोल’ कहे वो, सारे खाली हाथ गए।
तू भी खाली हाथ चलेगा, देखेंगे नर नार तुझे ।।
कह लिया कितनी बार तुझे। कह लिया कितनी बार तुझे।।
ओ३म् नाम का सुमिरन कर ले, कर दे भव से पार तुझे।










