निश्छल भाव से दान-वृत्ति के

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निश्छल भाव से दान-वृत्ति के

निश्छल भाव से दान-वृत्ति के
सात्विक भाव देवों में रहते
दीर्घ निरोगी जीवन देते
सुख देते कल्याण भी करते

सौम्य सरल भावों में ईश्वर
गुण देवत्व के भक्त को देते
भीतर से बाहर तक निश्छल
दिव्य गुणों से मन भर देते
दिव्य पुरुष निज भद्र सुमति से
लोकालोक को सार्थक करते
निश्छल भाव से दान-वृत्ति के
सात्विक भाव देवों में रहते

भाव दया का है देवों में
दान-भाव बेजोड़ है उनमें
ईश-कृपा और देव-प्रभाव से
दिव्य भाव उठते हैं मन में
दैविक गुण, कर्म और स्वभाव से
आत्मसात् उपदेश को करते
निश्छल भाव से दान-वृत्ति के
सात्विक भाव देवों में रहते

ज्ञानशील स्वाध्याय से बन के
चिन्तन-मनन उसी का करते
देवों के सखित्व को केवल
ऐसे साधक पाया करते
परिपूर्ण आयु हम पाएँ
इसी भूमि पर देवता बन के
निश्छल भाव से दान-वृत्ति के
सात्विक भाव देवों में रहते
दीर्घ निरोगी जीवन देते
सुख देते कल्याण भी करते