नारी है शक्ति निराली
नारी है शक्ति निराली,
पलटने वाली युगों की चालों को।
कथनी जो करनी में लातौ,
बनाके दिखलाती, शेर श्रृंगालोंको।
काल अवस्था को पहचाने,
वैसा ही करने की वह ठाने।
मिटती जो देखेगी आन,
करेगी बलिदान, जिगर
के लालों को।
नारी ने जितने नर बनाये,
रण में वो ही काम हैं आये।
पीछे कदम न हटाया,
छाती पै खाया,
तीर और भालों को।
यहाँ निराकार होता पाया
वहाँ पै ही महाभारत रचाया।
लेती दुश्मनों की जान,
भारी हैरान किया महिपालों को।










