नाम धन का मैं भर लूँ खजाना
नाम धन का मैं भर लूँ खजाना,
अन्त में न पड़े पछताना ॥
नाम जप-जप मिला है यह नर तन।
ध्यान रख-रख किया था ही सिमरन ।
प्रातः सायं था मन को लगाना।
अंत में न पड़े पछताना ।।
नाम धन की ही महिमा भारी।
सारे सपने हैं जन बेटे नारी।
हीरे स्वांस न वृथा गंवाना।
अंत में न पड़े पछताना ।।
पाप छल बल से जोड़ी है माया।
यौवन धन बल को पा इतराया।
नश्वर सुख का नहीं है ठिकाना।
अंत में न पड़े पछताना ।।
प्रेम भक्ति को हृदय में भर दो।
दिव्य शक्ति हो मेधा का वर दो।
छूट जाए मेरा आना-जाना।
अंत में न पड़े पछताना ।।










