नाम धन का मैं भर लूँ खजाना

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नाम धन का मैं भर लूँ खजाना

नाम धन का मैं भर लूँ खजाना,
अन्त में न पड़े पछताना ॥

नाम जप-जप मिला है यह नर तन।
ध्यान रख-रख किया था ही सिमरन ।
प्रातः सायं था मन को लगाना।
अंत में न पड़े पछताना ।।

नाम धन की ही महिमा भारी।
सारे सपने हैं जन बेटे नारी।
हीरे स्वांस न वृथा गंवाना।
अंत में न पड़े पछताना ।।

पाप छल बल से जोड़ी है माया।
यौवन धन बल को पा इतराया।
नश्वर सुख का नहीं है ठिकाना।
अंत में न पड़े पछताना ।।

प्रेम भक्ति को हृदय में भर दो।
दिव्य शक्ति हो मेधा का वर दो।
छूट जाए मेरा आना-जाना।
अंत में न पड़े पछताना ।।

छोटे कद का लघु कलेवर होने पर भी संकल्पशीलता के तेवर के बल पर, मनुष्य महान बन सकता है। – आचार्य चन्द्रशेखर