नैना मूंदकर ध्यान लगा रे।

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नैना मूंदकर ध्यान लगा रे।

तर्ज – झनक झनक तोरी बाजे…….

नैना मूंदकर ध्यान लगा रे।
मिलेगा तुझको तेरा सखा रे।।

है वो सारे जग का सहारा है
वो प्रियतम सभी से न्यारा
ना ‘सचिन’ तू जान ये पाया
उसका राज़ सभी से छुपा रे
नैना मूंदकर ध्यान लगा रे……

भक्ति में उसके ही सुख है
ओर कहीं तो दुःख ही दुःख है
शरण में जाकर उसकी नादाँ
इस जीवन को राह दिखा रे
नैना मूंदकर ध्यान लगा रे……..

जलचर थलचर नभचर में है
तेरे मन के वो घर में है आ जायेगा
नज़र तुझे वो सदा से दिल की उसे बुला रे
नैना मूंदकर ध्यान लगा रे…..