नहीं विचारा हाल पै अपने बैठकर कभी।(धुन-मिल गये नैना से नैना)
नहीं विचारा हाल पै
अपने बैठकर कभी।
हम क्या थे, क्या हो गये,
क्या होवेंगे अभी-टेक ।।
कहाँ से आना,
कहाँ पर जाना
पता ठिकाना बताना ।
जिसको है अपना
यह ज्ञान नहीं।
पशु समझो उसे
वह इन्सान नहीं।
जब हो यह विचार
मनुष्य कहलाओगे तभी ।।1।।
भूत भी अच्छा,
भविष्य भी अच्छा
यदि है वर्तमान अच्छा।
जिन बातों के ऊपर
अधिकार नहीं।
उन बातों का
करना प्रचार नहीं।।
मन से वचन से कर्म
से शुद्ध कहाओगे तभी ।।2।।
अपना फसाना है
सबको सुनाना,
लाना पुराना जमाना।
कहलायेगे विश्व के आचार्य,
बनायेगें सारी
दुनिया को आर्य।
शोभाराम ‘प्रेमी’
इच्छाये पूर्ण हो सभी,
हम क्या।।3।।










