न यह तेरा न यह मेरा

0
44

न यह तेरा न यह मेरा

न यह तेरा न यह मेरा,
मंदिर है भगवान का।
पानी उसकी भूमि उसकी,
सब कुछ उसी महान् का।।

हम सब खेल खिलौने उसके,
खेल रहा है करतार रे,
उसकी ज्योति सबमें चमके,
सबमें उसी का है प्यार रे
मन मंदिर में दर्शन कर ले,
उस प्राणों के प्राण का।।
न यह तेरा ………..

तीर्थ जाये मंदिर जाये,
अनगिन देव मनाएं रे,
दीन रूप में प्रभु खड़े हैं,

देख के नैन चुराए रे
मन की आंखे खुल जाये तो,
क्या करना और ज्ञान का।।
न यह तेरा ……….

कौन है ऊँचा, कौन है नीचा,
सब हैं एक समान रे,
प्रेम की ज्योति जगा हृदय में,
सब में प्रभु पहचान रे,
सरल हृदय को शरण में राखे,
प्रभु भोले नादान रे।।
न यह तेरा………

इसकी परवाह मत करो,
चाहे जमाना खिलाफ हो।
रास्ता वही चलो,
जो सीधा व साफ हो ।।