मुझे प्रेम का अमृत पिला दो प्रभु
जीवन नैया डग-मग डोले
व्याकुल पंछी पी-पी बोले
इस नैया को पार लगा दो प्रभु
मुझे प्रेम का अमृत पिला दो प्रभु
तन नगरी में पाप का डेरा
तुम बिन प्रियतम कौन है मेरा
अपनी भक्ति का हाथ बढ़ा दो प्रभु
मुझे प्रेम का अमृत पिला दो प्रभु
देश की सेवा में, जीवन बीते
ये काया हो – काम किसी के
मुझे देश की सेवा सिखा दो प्रभु
मुझे प्रेम का अमृत पिला दो प्रभु
बन कर तेरा भक्त भिखारी
दर पर तेरे झोली पसारी
अपनी भक्ति का हाथ बढ़ा दो प्रभु
मुझे प्रेम का अमृत पिला दो प्रभु
स्वर :- डॉ श्री रमेश जी सुग्रीम – गुयाना










