मुफ्तखोर बन जाय न अपना देश कमेरों का।

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मुफ्तखोर बन जाय न अपना देश कमेरों का।

मुफ्तखोर बन जाय न
अपना देश कमेरों का।
कुत्ते मिलकर मुँह न नोच लें
बब्बर शेरों का॥

बिजली पानी मुफ्त दे
रहे सुविधाएँ भारी।
वोटर को गुलाम करने
की पूरी तैयारी।
लैपटॉप कम्प्युटर बाँट
रहे इच्छाधारी।
राष्ट्रहितों पर चला रहे
हैं नेतागण आरी।
अन्धकार से भर देंगे
परिवेश सवेरों का॥१॥

लालच लोभ प्रलोभन देते
गिद्ध गँवारों को।
बुद्धि हरण का मन्त्र
जपाते हैं बेचारों को।
कैद कर लिया शीशमहल
में चाँद सितारों को।
जकड़ रहे बन्धन में
भोले राजकुमारों को।
काटा पानी नहीं माँगता
साँप गुहेरों का॥२॥

आप साइकिल पे
सवार पर स्कूटी बाँट रहे।
भद्दे रूप सरूप सभी
को ब्यूटी बाँट रहे।
देश रसातल में जाए
वह बूटी बाँट रहे।
टूटी चोर सुनो सोने
की टूटी बाँट रहे।
मन्त्र काटना होगा
मिलकर सभी लुटेरों का॥३॥

सूरज की तेजस्वी आभा
को मत मन्द करो।
सुथरा साफ राष्ट्र है
अपना इसे न गन्द करो।
पृथ्वीराज के आगे नहीं
खड़ा जयचन्द करो।
मुफ्त रेवड़ी बहुत बँट चुकी
इसको बन्द करो।
साँपों से भी बढ़कर है
आतंक सपेरों का॥४॥

सीधे सीधे रिश्वत देकर
सत्ता पाते हैं।
सत्ता पाते ही बन्दर
सा नाच नचाते हैं।
मुफ्त मुफ्त मुफ्ती सईद
का गीत सुनाते हैं।
जनता के पैसों से
शीशमहल बनवाते हैं।
करो नहीं अपमान अरे
शबरी के बेरों का॥५॥

श्रीलंका की श्री खोई
मत अपना मरण करो।
भस्मासुर को पहचानो
मत उसका वरण करो।
रावण की फिर से इच्छा
सीता का वरण करो।
खूब कमाओ खाओ
श्रमजीवी आचरण करो।
राजतिलक मत करो
मनीषी दुष्ट अँधेरों का॥६॥

सावधान हो जाओ वरना
सब लुट जाएगा।
दिव्य दिवाकर पर
काला बादल घुट जाएगा।
उच्छल जलधि तरंगा का
गौरव कुट जाएगा।
विश्वगुरु का परम
यशस्वी पद छुट जाएगा।
वे क्या जाने दर्द उखड़ते
तम्बू डेरों का॥७॥

भ्रष्टाचार शिखर पर
जागो जागो करदाता।
अपना सिंहस्वरूप
सँभालो प्यारे मतदाता।
तुम्हें बिकाऊ मान रहे हैं
कुर्सी के ज्ञाता।
राणा शिवा जाग जाओ
रोती भारतमाता।
मगरमच्छ कब दर्द
जानते मीन मछेरों का॥८॥