मानवता जी लो जीवन में

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मानवता जी लो जीवन में

मानवता जी लो जीवन में,
यही है सार जीवन का
धरम ये ही करम ये ही,
मानवता ही है हित सब का ।। टेक ॥

उन्नत खुद को करके ही
सभी को उन्नत है करना,
इसी धुन में सदा जीना
इसी धुन में हमें बढ़ना ।। १ ।।

खुशि बांटो खुशि पाओ
आनन्द बांटो आनन्द पाओ,
नियम ये ही तो सच्चा है
ये ही है धरम भापा का ।। २ ।।

स्ववत सबको जान लो
तुम कि आत्मवत ही है मानवता,
सब में ये खुद की भावना है
समझो सब को सब खुद जैसा ।। ३॥