मानव तू अगर चाहे दुनिया को झुका देना।
मानव तू अगर चाहे
दुनिया को झुका देना।
बस ईश्वर के आगे,
सर अपना झुका देना।।
राजी हो प्रभु जिसमें,
वह काम सही होगा।
भगवान जो चाहेगा,
दुनिया में वही होगा।
उसे अपना बना करके,
उलझन को मिटा देना।
मानव तू अगर चाहे दुनिया……..
रक्षक है अनाथों का,
दुखियों का सहारा है।
भव पार किया उसने,
जिसने ही पुकारा है।
उसे अपना बना करके,
उलझन सुलझा लेना।।
मानव तू अगर चाहे दुनिया……..
धरती और सागर के,
रत्नों को जो पाना हो।
आकाश में उड़ना हो,
पाताल में जाना हो।
डोरी परमेश्वर को,
पहले पकड़ा देना।।
मानव तू अगर चाहे दुनिया…….
चाहेंगी सदा तुझको,
खुशियाँ और आशाएँ।
चूमेगी चरण मेरे,
सब ओर सफलताएँ।
जीवन को ‘पथिक’
उसकी राहों पर लगा देना।।
मानव तू अगर चाहे दुनिया……..










