मन को वश करने वाला, तू मेरे से दूर जा।
मन को वश करने वाला
तू मेरे से दूर जा।
तू मुझे आकान्त न कर
मुझे अवकाश नहीं
कि मै तुझे सुनू
मुझे नाना कर्तव्यों की
जो पालना करनी है
सो तू मेरे से दूर जा।
जाग्रत अवस्था के पाप
अभिलाषाजन्य पाप
झूठी प्रशंसाजन्य पाप
और तो और स्वप्न मे
होने वाले पापो से भी
मै दूर रहना चाहता हूँ
सो तू मेरे से दूर जा।
मैं अशुभ वृत्तियों से
ऊपर उठ
प्रभु का सच्चा उपासक
बनना जो चाहता हूँ










