माँ तन्नै मेरी किस्मत फोंड़ दी री
तर्ज- (गीत) सुविधानुसार
(ये चारों कलियाँ मैंने लिखी हैं
मगर इस गीत की टेक
किसी अन्य लेखक की हैं सारंग)
माँ तन्नै मेरी किस्मत फोंड़ दी री
तन्नै मुझे कैसी ठोड़ दी
कहता सचिन ‘सारंग’ ना है
उनका रंग ढंग रिश्तेदारियाँ
उन्होंने तोड़ दी री तन्नै मुझे
कैसी ठोड़ दी माँ तन्नै मेरी……
मैं जो बैठी सन्ध्या करने
ध्यान परमेश्वर का धरने
सासू ने मेरी बाँह मरोड़ दी री
तन्नै मुझे कैसी ठोड़ दी
माँ तन्नै मेरी………
मैं रो-रो कै पहुँची घर में
एक लगा लट्ठ कमर में
मेरे पति ने मेरी नैड़ झिंझोड़ दी री
तन्नै मुझे कैसी ठोड़ दी माँ तन्नै मेरी……
वो बोला ले आ चाय बना के
मैं बोली ले आ दूध जा के उन्नै
चाय में लस्सी छोड़ दी री तन्नै
मुझे कैसी ठोड़ दी माँ तन्नै मेरी……










