मधुर वेद वीणा बजाते चलेंगे ।।
मधुर वेद वीणा बजाते चलेंगे ।।
सोते हुओं को जगाते चलेंगे ।
रोते हुओं को हंसाते चलेंगे ।१।।
जिन्हे मांस मदिरा का चस्का लगा है ,
उन्हे दूध गाय का पिलाते चलेंगे ।।२।।
हमारी जो मां बहिने भटकी हुई हैं ।
उन्हे वेद विद्या पढ़ाते चलेंगे ।।३।।
अछूतों को दे लात ठुकरा रहे जो ।
उन्हे हम गले से लगाते चलेंगे ।।४।।
धर्म छोड़ अपना विधर्मी बने जो ।
उन्हे धर्म वैदिक पर लाते चलेंगे ।।५।।
जो वापस में दिन रात लड़ते झगड़ते ।
उन्हे संगठन कर मिलाते चलेंगे ।।६।।
दयानन्द की आज्ञा पालन करेंगे ।
बनें आर्य जग को बनाते चलेंगे ।।७।।










