लिया जिन्दगी में जिसने प्रभु नाम का सहारा

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प्रभु नाम का सहारा (तर्ज रहा गर्दिशों में हरदम)

लिया जिन्दगी में जिसने
प्रभु नाम का सहारा
किश्ती जो थी भंवर में
उसे मिल गया किनारा
सूरज व चाँद तारे
आकाश में सजाये
ब्रह्माण्ड की ये रचना
कुदरत का नजारा।।
लिया……..

खाली गया न उसके
दर से कोई खाली
दीनों का नाथ है वो
निर्बलों का सहारा।
लिया………..

मानव जन्म को पाकर
बाजी को हमने जीता
विषयों में फंस के जीती
बाजी को हमने हारा।
लिया………

उसकी शरण में जाकर
दुःखों से छूट जाये
माता पिता वही है
बन्धु सखा हमारा।
लिया………

जीवन में भारती को
जब संकटों ने घेरा
तब उसकी रहमतों ने
हर रंजोगम को टारा।
लिया……..

सांप के डर से क्या चन्दन अपनी सुगधि और शीतलता छोड़ देता है? कांटे चुमने के डर से क्या फूल महकना और मुस्कुराना छोड़ वें? अपमान के भय से क्या संत संदेश देना छोड़ दे? अज्ञानियों से डरकर क्या ज्ञानी ज्ञान देना छोड़ दे? -आचार्य चन्धशेखर